अयोध्याकाण्ड

भाग-१(1) राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार 

भाग-२(2) राजा दशरथ द्वारा श्रीराम के राज्याभिषेक का प्रस्ताव तथा सभासदों द्वारा श्रीराम के गुणों का वर्णन करते हुए उक्त प्रस्ताव का सहर्ष युक्तियुक्त समर्थन

भाग-३(3) राजा दशरथ का वशिष्ठ और वामदेवजी को श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी करने के लिये कहना राजा का अपने पुत्र श्रीराम को हितकर राजनीति की बातें बताना

भाग-४(4) श्रीराम का कौशल्या के भवन में जाकर माता को यह समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करके अपने महल में जाना

भाग-५(5) राजा दशरथ के अनुरोध से वशिष्ठजी का सीता सहित श्रीराम को उपवास व्रत की दीक्षा देकर आना, सीता सहित श्रीराम का नियम परायण होना और हर्ष में भरे पुरवासियों द्वारा नगर की सजावट 

भाग-६(6) सरस्वती का मन्थरा की बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा संवाद, श्रीराम के अभिषेक का समाचार पाकर खिन्न हुई मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना 

भाग-७(7) कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोपभवन में प्रवेश

भाग-८(8) राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दु:खी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना

भाग-९(9) कैकेयी का राजा को प्रतिज्ञाबद्ध करके उन्हें पहले के दिये हुए दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना

भाग-१०(10) महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना

भाग-११(11) राजा का विलाप और कैकेयी से अनुनय-विनय

भाग-१२(12) कैकेयी का राजा को सत्य पर दृढ़ रहने के लिये प्रेरणा देकर अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना

भाग-१३(13) सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना

भाग-१४(14) सुमन्त्र का श्रीराम के महल में पहुँचकर महाराज का संदेश सुनाना 

भाग-१५(15) श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना और कैकेयी का कठोरता पूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताकर श्रीराम को वनवास के लिये प्रेरित करना

भाग-१६(16) श्रीराम की कैकेयी के साथ बातचीत और वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौशल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना

भाग-१७(17) श्रीराम का कौशल्याजी के भवन में जाना और उन्हें अपने वनवास की बात बताना, कौशल्या का अचेत होकर गिरना और  विलाप करना

भाग-१८(18) लक्ष्मण का रोष, उनका श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का धर्म पर ही दृढ़ रहना 

भाग-१९(19) श्रीराम का लक्ष्मण को समझाते हुए अपने वनवास में दैव को ही कारण बताना तथा लक्ष्मण द्वारा दैव का खंडन करना 

भाग-२०(20) विलाप करती हुई कौशल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना और कौशल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गलकामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना  

भाग-२१(21) श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का पिता की आज्ञा से वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना

भाग-२२(22)  सीता की श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये प्रार्थना, श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना 

भाग-२३(23) सीता का वन में चलने के लिये अधिक आग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना

भाग-२४(24) श्रीराम से लक्ष्मण का साथ वन में चलने के लिए विनती करना  

भाग-२५(25) श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का माता सुमित्रा और उर्मिला से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना

भाग-२६(26) सीता सहित श्रीराम का वशिष्ठ पुत्र सुयज्ञ को बुलाकर उनके तथा उनकी पत्नी के लिये बहुमूल्य आभूषण, रत्न और धन आदि का दान 

भाग-२७(27) सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का दु:खी नगरवासियों के मुख से तरह-तरह की बातें सुनते हुए पिता के दर्शन के लिये कैकेयी के महल में जाना

भाग-२८(28) सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना 

भाग-२९(29) अवधवासियों का विषाद, कैकेयी को समझाना

भाग-३०(30) सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस से मस न होना

Page 1                                Page 2                       Page 3                            Page 4















No comments:

Post a Comment

रामायण: एक परिचय

रामायण संस्कृत के रामायणम् का हिंदी रूपांतरण है जिसका शाब्दिक अर्थ है राम की जीवन यात्रा। रामायण और महाभारत दोनों सनातन संस्कृति के सबसे प्र...